Motivational Story In Hindi: जीवन में हमें कई बार ऐसे लोग मिलते हैं जो हमें नुकसान पहुंचाना चाहते हैं लेकिन अगर हम समझदार और धैर्यवान हों तो कोई भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। आज की यह कहानी एक मगरमच्छ और कछुए की है जो हमें चालाकी, धैर्य और आत्मविश्वास का असली पाठ पढ़ाती है।
मगरमच्छ की चालाकी
एक नदी में एक मगरमच्छ रहता था। उसी नदी में एक कछुआ भी रहता था। मगरमच्छ को पता था कि कछुए को वह खा नहीं सकता क्योंकि उसका खोल बहुत मोटा और मजबूत है। लेकिन मगरमच्छ के मन में हमेशा कछुए को हराने की इच्छा रहती थी। वह दिन-रात यही सोचता रहता कि किसी तरह कछुए को मात दी जाए।
मगरमच्छ ने बनाई चाल
एक दिन मगरमच्छ ने एक चाल सोची। वह कछुए के पास गया और बड़े प्यार से बोला, “दोस्त, मैंने सुना है कि नदी के उस पार बहुत हरी-भरी घास और स्वादिष्ट फल हैं। चलो आज हम दोनों साथ मिलकर वहां चलते हैं।” कछुआ समझदार था। उसने मगरमच्छ की आंखों में झांका और मन ही मन उसकी चाल को भांप लिया। लेकिन उसने कुछ नहीं कहा और शांति से मुस्कुरा दिया।
कछुए की समझदारी
कछुए ने कहा, “ठीक है दोस्त, लेकिन नदी पार करने में मुझे थोड़ा समय लगेगा। तुम आगे चलो, मैं आता हूं।” मगरमच्छ आगे चला गया और बीच नदी में कछुए का इंतजार करने लगा। उसकी योजना थी कि जैसे ही कछुआ पानी में आएगा वह उसे पलटकर उसके नरम पेट पर वार करेगा। लेकिन कछुआ किनारे पर ही बैठा रहा और नदी में उतरा ही नहीं।
मगरमच्छ का गुस्सा
काफी देर इंतजार करने के बाद मगरमच्छ वापस किनारे पर आया और गुस्से से बोला, “तुम आए क्यों नहीं?” कछुए ने शांति से जवाब दिया, “दोस्त, मुझे अचानक याद आया कि मुझे आज कहीं और जाना है। माफ करना।” मगरमच्छ दांत पीसता रह गया लेकिन कुछ कर नहीं सका।
फिर से नई चाल
अगले दिन मगरमच्छ फिर एक नई चाल लेकर आया। इस बार उसने कछुए से कहा, “दोस्त, आज नदी में बाढ़ आने वाली है। तुम मेरी पीठ पर बैठ जाओ, मैं तुम्हें सुरक्षित किनारे पर पहुंचा दूंगा।” कछुआ मन ही मन मुस्कुराया। उसे पता था कि यह भी एक चाल है। उसने कहा, “बहुत शुक्रिया दोस्त, लेकिन मुझे तैरना आता है और मेरा खोल मुझे पानी में डूबने नहीं देता। तुम चिंता मत करो।”
कछुए का आत्मविश्वास
मगरमच्छ बार-बार कोशिश करता रहा लेकिन कछुआ हर बार अपनी समझदारी और धैर्य से उसकी चालों को नाकाम कर देता। कछुए को अपनी कमजोरियों का भी पता था और अपनी ताकत का भी। वह जानता था कि उसकी असली ताकत उसका खोल नहीं बल्कि उसकी सोच और समझ है।
जीवन की सीख
एक दिन मगरमच्छ थककर कछुए के पास आया और बोला, “यार, मैं हार मानता हूं। तुम्हें कोई नहीं हरा सकता।” कछुए ने मुस्कुराते हुए कहा, “दोस्त, मुझे हराना मुश्किल नहीं है। बस इसके लिए ताकत नहीं, समझदारी चाहिए। और जो खुद को पहचान लेता है उसे दुनिया की कोई भी ताकत नहीं हरा सकती।”
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन में दुश्मन कितना भी ताकतवर क्यों न हो, अगर हम धैर्य रखें, अपनी ताकत को पहचानें और समझदारी से काम लें तो हर मुश्किल से बाहर निकल सकते हैं। घबराहट और जल्दबाजी ही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी होती है।
Disclaimer: यह कहानी केवल नैतिक शिक्षा और प्रेरणा के उद्देश्य से लिखी गई है। यह एक काल्पनिक कथा है जो जीवन में धैर्य और समझदारी से काम लेने की प्रेरणा देती है।